UP Bhulekh (यूपी भूलेख) पोर्टल उत्तर प्रदेश राजस्व परिषद द्वारा ज़मीन के रिकॉर्ड्स को डिजिटल करने की एक बेहतरीन पहल है। अब ज़मीन के रिकॉर्ड्स में 100% पारदर्शिता आ गई है। अब आपको अपनी ज़मीन का विवरण (Land Record), खसरा-खतौनी (Khasra Khatauni) या नक्शा देखने के लिए तहसील के चक्कर लगाने की ज़रूरत नहीं है।
हाल ही में सरकार ने रियल-टाइम अंश निर्धारण, आधार सीडिंग (Aadhaar Seeding) और डिजिटल फसल सर्वे (e-Khasra) जैसी नई सुविधाएँ लागू कर दी हैं, जिससे ज़मीनी विवादों पर रोक लग रही है।
महत्वपूर्ण यूपी भूलेख पोर्टल लिंक्स (Quick Links)
रियल-टाइम खतौनी
यहाँ देखेंआधार लिंक (Seeding)
आधार लिंक करेंई-खसरा पड़ताल
फसल विवरणवरासत (उत्तराधिकार)
ऑनलाइन आवेदनयूपी भूलेख खतौनी ऑनलाइन कैसे देखें? (Step-by-Step)
अगर आप अपनी ज़मीन की खतौनी (Khatauni) ऑनलाइन डाउनलोड करना चाहते हैं, तो नीचे दिए गए आसान स्टेप्स को फॉलो करें:
- सबसे पहले यूपी भूलेख की आधिकारिक वेबसाइट upbhulekh.gov.in पर जाएं।
- होमपेज पर "रियल टाइम खतौनी की नकल देखें" के विकल्प पर क्लिक करें।
- स्क्रीन पर दिए गए कैप्चा (Captcha) कोड को भरें।
- अब अपना जनपद (District), तहसील (Tehsil) और ग्राम (Village) का चयन करें।
- आप अपनी खतौनी तीन तरीकों से खोज सकते हैं: खसरा/गाटा संख्या द्वारा, खाता संख्या द्वारा, या खातेदार के नाम द्वारा।
- जानकारी दर्ज करने के बाद "खोजें" पर क्लिक करें और अपनी खतौनी पीडीएफ (PDF) में डाउनलोड कर लें।
रियल-टाइम खतौनी और 'अंश निर्धारण' क्या है?
पहले यूपी में खतौनी का फॉर्मेट 13 कॉलम का होता था, जिसमें परिवार के सभी सदस्यों के नाम तो होते थे, लेकिन यह नहीं लिखा होता था कि किस व्यक्ति का कितना हिस्सा है। इससे पारिवारिक विवाद बहुत होते थे।
अब सरकार ने रियल-टाइम खतौनी (19 कॉलम फॉर्मेट) लागू कर दी है। इसमें सबसे महत्वपूर्ण बदलाव 'अंश निर्धारण' (Share Determination) का है। अब खतौनी में हर खातेदार (मालिक) के नाम के आगे स्पष्ट रूप से लिखा होता है कि पूरी ज़मीन में उसका कितना हिस्सा (जैसे 1/2, 1/4 या 0.250 हेक्टेयर) है। कोई भी ज़मीन की खरीद-बिक्री (Registry) होते ही यह खतौनी तुरंत (Real-time) अपडेट हो जाती है।
ज़मीन के फर्जीवाड़े को रोकने और पीएम किसान योजना का पैसा सही किसान को देने के लिए यूपी सरकार ने सभी किसानों के लिए अपनी ज़मीन को आधार से लिंक करना (Aadhaar Seeding) ज़रूरी कर दिया है। आप यूपी भूलेख पोर्टल पर जाकर अपने गाटा संख्या (Khasra No) के ज़रिए चेक कर सकते हैं कि आपका खाता आधार से लिंक है या नहीं। यदि नहीं है, तो तुरंत अपने लेखपाल से संपर्क करें।
ई-खसरा पड़ताल (e-Khasra Padtal) का नया नियम
पहले लेखपाल रजिस्टर में लिखकर बताते थे कि किस खेत में कौन सी फसल बोई गई है। अब सरकार ने 'ई-खसरा पड़ताल' पोर्टल और मोबाइल ऐप लॉन्च कर दिया है।
- अब लेखपाल खेत में जाकर GPS लोकेशन के साथ फसल की फोटो खींचकर पोर्टल पर अपलोड करते हैं।
- किसान यूपी भूलेख पोर्टल पर जाकर अपने गाटे (खसरे) की स्थिति देख सकते हैं कि सरकारी रिकॉर्ड में उनके खेत में कौन सी फसल (गेहूं, धान, गन्ना आदि) दर्ज़ की गई है।
- यदि फसल का विवरण गलत दर्ज़ है, तो किसान तुरंत ऑनलाइन आपत्ति जता सकता है। इससे आपदा के समय फसल मुआवज़ा (Crop Insurance) मिलने में बहुत आसानी होती है।
वरासत (Varasat) के लिए ऑनलाइन आवेदन कैसे करें?
ज़मीन के मालिक की मृत्यु के बाद, ज़मीन को उसके कानूनी वारिसों (पति/पत्नी, बेटे, बेटियों) के नाम पर दर्ज कराने की प्रक्रिया को वरासत (Succession) कहते हैं। अब इसके लिए तहसील में बाबू को पैसे देने की ज़रूरत नहीं है:
- राजस्व न्यायालय (vaad.up.nic.in) पोर्टल पर जाएं।
- 'उत्तराधिकार / वरासत हेतु आवेदन' विकल्प पर क्लिक करें।
- आवेदक का मोबाइल नंबर डालकर OTP से लॉगिन करें।
- मृतक खातेदार का विवरण और मृत्यु प्रमाण पत्र (Death Certificate) अपलोड करें।
- सभी कानूनी वारिसों का नाम, उम्र और आधार नंबर दर्ज़ करें।
- फॉर्म सबमिट करने के बाद, यह सीधे आपके इलाके के लेखपाल के पास ऑनलाइन चला जाता है, जो जाँच के बाद वरासत दर्ज कर देता है।
यदि रियल-टाइम खतौनी में आपके नाम की स्पेलिंग गलत हो गई है या रकबा (Area) कम दर्ज हो गया है, तो आप IGRS (जनसुनवाई) पोर्टल पर या सीधे एसडीएम (SDM) न्यायालय में धारा-38 के तहत त्रुटि सुधार का ऑनलाइन वाद (केस) दायर कर सकते हैं। बिना आदेश के लेखपाल खतौनी में बदलाव नहीं कर सकता। (अधिक जानकारी के लिए हमारी त्रुटि सुधार गाइड पढ़ें।)